Ram Mandir Original Murti:1949 में रामलला की जो मूर्ति ‘प्रकट’ हुई थी वो कहां गई,जाने सच

Ram Mandir Original Murti:1949 में रामलला की जो मूर्ति ‘प्रकट’ हुई थी वो कहां गई,जाने सच

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का कार्य प्रगति पर है और इस मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होने की उम्मीद है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल होंगे। हालांकि, इस बड़े धार्मिक क्षेत्र के निर्माण के बीच, नई मूर्तियों की चर्चा में राजनीतिक विवाद उठा है।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस विवाद में शामिल होकर सवालों को उठाया है, कहते हैं कि वहां पहले से ही रामलला की मूर्ति है, फिर नई मूर्तियां क्यों लगा रहे हैं। इसके जवाब में, विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने स्पष्टता से बताया कि पुरानी मूर्ति ही नए मंदिर में स्थापित की जाएगी, जबकि भक्तों के दर्शन के लिए एक बड़ी मूर्ति भी होगी।

नए राम मंदिर की योजना में तीन फ्लोर होंगे, जिसमें भगवान श्रीराम की अलग-अलग मूर्तियां होंगी। गर्भगृह में रामलला बाल स्वरूप में विराजेगा, जबकि ट्रस्ट द्वारा बताया गया है कि अलग-अलग तरह के पत्थरों पर 3 मूर्तियां बन रही हैं। कौन सी मूर्ति किस फ्लोर पर लगेगी, यह तय होना अभी बाकी है। इसके अलावा, रामलला की दो मूर्तियां काले पत्थर की और एक संगमरमर की बन रही हैं, जो माता सीता और लक्ष्मण के साथ होंगी।

इस परियोजना के बारे में चर्चा का हिस्सा बनने वाले सभी मंचों ने विभिन्न दृष्टिकोण से इसे देखा है, और राजनीतिक रूप से इसमें हो रहे विवाद को सुलझाने की कोशिश की जा रही है।

रामलला की मूर्ति का इतिहास:

Ram Mandir Original Murti:74 साल पहले, 1949 में, अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के विवाद के दौरान हुई घटना ने देश में बड़ा आंदोलन उत्पन्न किया। 22-23 दिसंबर 1949 की रात, मस्जिदनुमा गुंबद के नीचे रामलला की मूर्ति की खोज हुई, जिसके बाद हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच उत्तेजना बढ़ी। हिंदू धर्माधिकारियों का दावा था कि रामलला प्रकट हुए हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसे चुपचाप रखा गया बताया।

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Ram Mandir Original Murti:उसके पश्चात्ताप में, सरकारी ढांचे पर विवाद को देखते हुए, दूसरे दिन ही सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ताला लगा दिया। 1950 में, हिंदू पक्ष ने याचिका लगाई, मांगते हुए कि भगवान के दर्शन और पूजा का अधिकार हिंदू समुदाय को मिले। फैजाबाद के सिविल जज ने हिंदू धर्माधिकारियों को बंद दरवाजे के बाहर से दर्शन की इजाजत दे दी, लेकिन मूर्तियों को हटाने पर रोक लगा दी।

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इस घड़ीचक्कर में, ताला 1986 में कोर्ट के आदेश के बाद खोला गया और इस परिस्थिति का क्रेडिट राजीव गांधी को दिया गया। इस दौरान, विश्व हिंदू परिषद ने जमीन पर गड्ढा खोदकर शिला पूजन भी किया। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि क्रेडिट इस घटना का राजीव गांधी को नहीं, बल्कि कोर्ट को जाता है।

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