सुप्रीम कोर्ट ने पकड़ौआ विवाह पे रोक क्यू लगाई, जाने पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने पकड़ौआ विवाह पे रोक क्यू लगाई, जाने पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस हिमा कोहली और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने एक पकड़ौआ विवाह के मामले में पटना हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई है और संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। पटना हाईकोर्ट ने पिछले साल नवंबर में एक मामले में विवाह को अमान्य ठहराया था, कहते हुए कि सात फेरे पूर्ण होने पर ही विवाह को कानूनी रूप से बाध्यकारी ठहराया जा सकता है।

हाईकोर्ट ने एक सेना के जवान की ओर से दाखिल याचिका पर इस आधार पर फैसला किया था, जिसमें उच्चतम न्यायालय ने दुल्हन की अपील पर अंतरिम आदेश जारी किया है। युवक ने याचिका में आरोप लगाया था कि उसे दुल्हन के साथ जबरदस्ती शादी करने के लिए मजबूर किया गया था, जिसे हाईकोर्ट ने मान्यता दी थी।

यह भी पढ़ें:18 साल बाद बिहार में रणजी ट्रॉफी,मुंबई से पहला मुकाबला

लड़की ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और उसने अब उच्चतम न्यायालय की जस्टिस कोहली और जस्टिस अमानुल्लाह से इस मामले में नोटिस प्राप्त करके उत्तर मांगा है

जाने पकड़ौआ विवाह क्या है:

पकड़ौआ विवाह, जो बिहार की एक बदनाम प्रथा है, में युवाओं को अपहरण करके उन्हें शादी के लिए मजबूर करने का प्रचलन है। इस प्रकार की विवाह प्रथा में, लड़की के परिवार ऐसे दामाद की तलाश में होते हैं जो पढ़ा-लिखा हो, नौकरी करता हो, और भविष्य सुरक्षित हो। बिहार में इस प्रकार की विवाह प्रथा के कुछ क्षणों में, दहेज की मांग करने के बजाय, परिवारों को लगता है कि यह एक बेहतर विकल्प है जिससे उन्हें अच्छा दामाद मिल सकता है।

पकौड़ा विवाह
पकौड़ा विवाह

समाजशास्त्रियों के अनुसार, पकड़ौआ विवाह का चलन बिहार में 70 के दशक में फैला। अस्सी और नब्बे के दशक में इस प्रथा ने पूरे बिहार में चरम पर पहुँच जाने का पर्याप्त माध्यम प्रदान किया। 1990 के दशक में यह चलन इतना प्रचलित था कि 2010 में इस पर एक फिल्म ‘अंर्तद्वंद’ बनी, जो राष्ट्रीय पुरस्कार जीती।

यह भी पढ़ें:KK Pathak Degree:कितने पढ़े लिखे हैं केके पाठक

Buy Online Mutton Home Delivery

 

 

 

Sharing Is Caring:

Leave a Comment