अमेरिका ने तानाशाह सद्दाम हुसैन को फांसी क्यों दी थी

अमेरिका ने तानाशाह सद्दाम हुसैन को फांसी क्यों दी थी

30 दिसंबर 2006 को, सुबह के 5:30 बजे, इराक के बगदाद में अमेरिकी सैनिकों ने सद्दाम हुसैन को हथकड़ी में जकड़ा लिया और फिर उसे फांसी देने का फैसला किया। इन सैनिकों की आंखों में आंसू थे। सद्दाम हुसैन ने कुरान हाथ में लिए हुए हताश नजर आए। उन्होंने फांसी के समय काला नकाब पहनने से मना किया, लेकिन उनका कोई अन्य प्रतिरोध नहीं था। 6 बजे में, सद्दाम को फांसी लगा दी गई। आज से इस घटना को 17 साल हो गए हैं।

सद्दाम हुसैन का जन्म 28 अप्रैल 1937 को बगदाद के तिकरित स्थित एक गांव में हुआ था। उन्होंने बगदाद में कानून की पढ़ाई की। 1957 में, सद्दाम ने सिर्फ 20 साल की आयु में बाथ पार्टी में शामिल हो गए। यह पार्टी अरब देशों में राष्ट्रवाद का प्रमोट कर रही थी, और 1962 में इराक में हुए सैन्य विद्रोह के बाद सद्दाम भी उसका हिस्सा बन गए।

saddam hussein

सद्दाम हुसैन को फांसी:1979 में, सद्दाम हुसैन ने खराब स्वास्थ्य के बहाने से जनरल बक्र को इस्तीफा देने के लिए दबाव डाला और खुद को देश के 5वें राष्ट्रपति के रूप में घोषित किया। जब उन्होंने सत्ता में कब्जा किया, तो उन्होंने अपने विरोधियों के प्रति सख्ती बढ़ाई और उन्हें मारना शुरू कर दिया।

 कुवैत युद्ध: 1990 में, सद्दाम ने कुवैत पर हमला करने का आदेश दिया, जिससे अमेरिका ने इराक पर कड़ी प्रतिबंध लगाए और खगोल युद्ध शुरू हुआ। गठबंधन के साथ इराक को हराना पड़ा, जिससे देश को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

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सद्दाम की गिरफ्तारी: 2003 में अमेरिका ने इराक पर हमला किया और सद्दाम को गिराया गया। उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई और उनकी मौत 30 दिसंबर 2006 को हुई।

सद्दाम हुसैन को फांसी का अंतिम पल: सद्दाम को फांसी की सजा सुनाई जाते समय उन्होंने किसी तरह का विरोध नहीं किया, लेकिन उनकी हताशी और कमजोरी आंखों में साफ दिखाई दी। सुबह के 5:30 बजे उन्हें फांसी पर लटकाया गया, जिसके बाद उनकी सैनिकों की आंखों में आंसू थे।

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